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हाई कोलेस्ट्रॉल: हृदयघात के छिपे हुए तीन चेतावनी संकेत

 हाई कोलेस्ट्रॉल: हृदयघात के छिपे हुए तीन चेतावनी संकेत

शरीर में कोलेस्ट्राल का बढ़ जाना कई परेशानियां लेकर आता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक के साथ ही दिल और नसों से जुड़ी दूसरी समस्याएं पैदा होने लगती है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण शरीर में पहले से ही दिखाई देने लगते हैं। अगर आप इन लक्षणों को शुरू में ही पहचान लें तो कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से आप बच सकते हैं। भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि आयु, जीवनशैली और खान-पान के कारण, इन लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने की आवश्यकता हो सकती है। उच्च कोलेस्ट्रॉल से हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य दिल से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

कोलेस्ट्रॉल वसा का एक रूप है। मोम जैसी यह चीज विटामिन डी, कुछ खास तरह के हार्मोन और कोशिकाओं को बनाने में मददगार होता है। अगर यही कोलेस्ट्रॉल दो सौ मिलीग्राम फी डेसीलीटर तक बढ़ जाए तो यह नुकसानदेह हो सकता है। अगर रक्त में कोलेस्ट्रॉल का लेवल काफी टाइम तक ज्यादा बना रहता है तो यह दिल के लिए खतरनाक हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि यह चुपचाप बढ़ता रहता है और इसका पता देर से चल पाता है। इसका लेवल जब हाई हो जाता है तो यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो जाता है।

कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ने के लक्षण आपके शरीर में पहले से दिखाई देने लगते हैं, और इन्हें पहचानना महत्वपूर्ण है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के बारे में सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसका पता काफी देर से चलता है। दरअसल कोलेस्ट्रॉल का लेवल हाई होने के इनीशियल सिमटम्स बहुत हल्के होते हैं। इसकी वजह से इस बारे में लोग ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। गौर न करने की वजह से यह बढ़ते-बढ़ते उस स्टेज पर पहुंच जाता है, जब यह सेहत को नुकसान पहुंचा चुका होता है। क्लाउडिकेशन, पैरों की ठंडक, और त्वचा का रंग बदलना, कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ने के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। आपको अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और अपनी जांच करानी चाहिए अगर आपको ये लक्षण दिखाई देते हैं।

पहले ही पहचान सकते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल

सेहत के प्रति अगर जागरूकता रखी जाए तो कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने के बारे में पहले ही जानकारी हो सकती है। क्लाउडिकेशन एक ऐसी स्थिति को कहते हैं, जिसमें नसों में खून के दौरान में रुकावट की वजह से दर्द के लक्षण जाहिर होने लगते हैं। इसमें पैरों में ऐंठन होना और थकान सी महसूस होना खास लक्षण है। यह दर्द और ऐंठन कुछ दूरी तक चलने के बाद होता है। कुछ देर आराम करने के बाद यह ठीक भी हो जाता है। यह दर्द आमतौर पर पैरों, थाई, हिप और आसपास होता है।

अगर पैर ठंडे पड़ जा रहे हैं तो यह कोलेस्ट्रॉल के हाई होने का दूसरा लक्षण है। अगर गर्मी में भी पैर ठंडे हो रहे हैं और उनमें कंपन भी हो रहा है तो यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज की तरफ इशारा हो सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रहती है तो इसे बिल्कुल भी नहीं टालना चाहिए। इस बारे में तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई होने की स्थिति में खून की वाहिकाओं में प्लाक इकट्ठा होना शुरू हो जाता है। इससे खून के बहाव में परेशानी पैदा होती है। जहां पर खून का बहाव कम होता है, तो न सिर्फ वहां की त्वचा का रंग बदलने लगता है, बल्कि बनावट में भी तब्दीली आ जाती है। अगर आपके पैरों का स्किन कलर बदल रहा है और उसकी बनावट में भी कुछ फर्क नजर आ रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। मुमकिन है कि ऐसा कोलेस्ट्राल लेवल हाई होने की वजह से हो रहा हो। ध्यान रखने की बात यह है कि ऐसे किसी भी लक्षण के नजर आने पर आपको परेशान बिल्कुल भी नहीं होना है। ऐसी स्थिति आने पर आपको अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए और अपनी जांच करानी चाहिए।

ऑस्ट्रेलियाई सरकारी वेबसाइट्स जो इस विषय पर जानकारी प्रदान करती हैं:

  1. Better Health Channel (बेटर हेल्थ चैनल): https://www.betterhealth.vic.gov.au/ – यह वेबसाइट विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं और उनके लक्षणों, उपचार और.AI<|im_sep|>1. ऑस्ट्रेलियाई भारतीयों के लिए कोलेस्ट्रॉल की समस्या एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, खासकर उनके आहार और जीवनशैली के कारण।
  2. आर्टिकल द्वारा बताए गए तीन लक्षण – पैरों में दर्द और थकान, पैरों की ठंडक और त्वचा के रंग और बनावट में बदलाव – यह सभी उनके लिए संबंधित हो सकते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
  3. ऑस्ट्रेलियाई भारतीयों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर की निगरानी करें और यदि उन्हें इन लक्षणों में से किसी का अनुभव होता है, तो वे तुरंत मेडिकल एडवाइस लें।
    ऑस्ट्रेलियाई सरकारी वेबसाइटें, जो इस विषय पर जानकारी प्रदान करती हैं:
  4. Better Health Channel (बेटर हेल्थ चैनल): https://www.betterhealth.vic.gov.au/
  5. Healthdirect Australia (हेल्थडायरेक्ट ऑस्ट्रेलिया): https://www.healthdirect.gov.au/
  6. Department of Health (स्वास्थ्य विभाग): https://www.health.gov.au/
  7. Heart Foundation (हार्ट फाउंडेशन): https://www.heartfoundation.org.au/
  8. Diabetes Australia (डायबिटीज ऑस्ट्रेलिया): https://www.diabetesaustralia.com.au/

Varsha Saini

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